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Showing posts from May, 2020

चीन के उकसावे में नेपाल ने फिर कर दी बहुत बड़ी नादानी, क्या होगा भारत का रिएक्शन – जानें यहां

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नई दिल्ली। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली के हठधर्मी भरे व्यवहार की वजह से भारत और नेपाल के संबंध लगातार तनावपूर्ण होते जा रहे हैं। केपी शर्मा ओली सरकार के बारे में कहा जा रहा है कि वो चीन के दबाव में भारत के साथ संबंधों को खराब कर रहे हैं। चूंकि इस समय चीन पर अमेरिका और दुनिया के बाकी देशों ने कोरोना वायरस की जांच का दबाव बना रखा है। ताईवान को भारत का समर्थन मिल जाने से भी चीन बौखलाया हुआ है। इसलिए चीन भारत के खिलाफ नेपाल की ओली सरकार को इस्तेमाल कर रहा है। नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली यह जानते हुए भी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के हाथों की कठपुतली बनने को तैयार हो गये हैं। केपी शर्मा ओली ने भारतीय क्षेत्र को नेपाल का हिस्सा बताकर नक्शा संसोधन का बिल संसद में पेश किया और अब नेपाल सीमा को बंद कर वहां नेपाल सशस्त्र बल को तैनात कर दिया है। भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा को लेकर जारी सीमा का विवाद के बीच नेपाल ने भारत के साथ अपनी सीमा सील कर दी है। बताया गया है कि कोरोना वायरस के खतरे के चलते ऐसा फैसला किया गया है। जगह-जगह चेकपोस्ट लगाए गए हैं जहां न...

विशेषज्ञों की राय: बारिश में बढ़ सकता है कोरोना संक्रमण, नमी में तीव्र होते हैं वायरस

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अमेरिका की जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी एपलाइड फिजिक्स लेबोरेटरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक जेर्ड इवांस कहते हैं कि अभी यह पता नहीं कि सीमित बारिश का असर वायरस पर क्या होगा। हालांकि, अधिकांश विशेषज्ञ यह मानते हैं कि बारिश में नमी के कारण वायरस तीव्र हो जाता है, जिससे बारिश में संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी के ग्लोबल हेल्थ, मेडिसिन और एपिडिमियोलॉजी के प्रोफेसर जेर्ड बेटेन कहते हैं कि बारिश कोरोनावायरस को डायल्यूट (घोलकर कमजोर कर देना) कर सकती है। जिस तरह धूल बारिश के पानी में घुलकर बह जाती है, ठीक वैसे ही यह कोरोनावायरस भी बह सकता है। वहीं कई विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश साबुन के पानी की तरह सतह को डिसइंफेक्ट करने में सक्षम नहीं है। बारिश और कोरोना से जुड़े दो अहम सवाल क्या बारिश से वायरस साफ नहीं हो सकते हैं? यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के मुताबिक, ऐसे मामले भी आए हैं जिनमें 17 दिनों के बाद भी सतह पर कोरोना वायरस पाया गया है। ऐसे में फिलहाल यह नहीं कहा जा सकता है कि बारिश से किसी सतह, मैदान या कुर्सी पर लगा वायरस साफ हो जाएगा। इसलिए बारिश में अतिरिक्त सावधानी जरूर...

हॉटस्पॉट न्यूयॉर्क में 83 दिन के बाद काम पर लौटेंगे 4 लाख लोग, चर्च भी खुला मगर 10 से ज्यादा लोगों को इकट्ठा होने की अनुमति नहीं

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अमेरिका में कोरोना से सबसे ज्यादा प्रभावित न्यूयॉर्क सिटी में 8 जून से लॉकडाउन खुल जाएगा। करीब 4 लाख कर्मचारी 83 दिन के बाद काम पर लौट सकेंगे। न्यूयॉर्क के गवर्नर एंड्रयू क्यूमो ने इसकी घोषणा की है। न्यूयॉर्क सिटी 15 मार्च से बंद है। इस महीने की शुरुआत में न्यूयॉर्क राज्य के ज्यादातर क्षेत्रों में लॉकडाउन में ढील दी गई थी, लेकिन न्यूयॉर्क सिटी में नहीं दी गई थी। गवर्नर क्यूमो ने कहा है कि न्यूयॉर्क सिटी में अलग-अलग चरणों में लॉकडाउन में ढील दी जाएगी। पहले चरण में निर्माण कार्य, उत्पादन और माल की थोक आपूर्ति की अनुमति दी जा रही है। लोग कृषि, वानिकी और मछली पालन के कार्य दोबारा शुरू कर सकेंगे। न्यूयॉर्क के अन्य 5 क्षेत्र लॉकडाउन में छूट के दूसरे चरण में खोले जाएंगे। इसके तहत रियल एस्टेट सर्विस, खुदरा दुकानें और कुछ हेयर सैलून खोलने की अनुमति होगी। अमेरिका में 17.99 लाख से ज्यादा मरीज और एक लाख से ज्यादा मौतें हुई हैं। न्यूयॉर्क सिटी में 1.99 लाख केस और 20,000 मौतें हुई हैं। टकराव: अमेरिका ने चीनी छात्रों को आने से रोका; चीन बोला- यह नस्लवाद है राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पीपुल्स लि...

ब्रिटेन समेत यूरोपीय देशों के वैज्ञानिकों को आशंका- कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ऐप से खतरे में पड़ सकती है प्राइवेसी; पारदर्शिता पर भी सवाल

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दुनिया के कई देश कोरोना के प्रसार को मापने के लिए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग ऐप पर काम कर रहे हैं। भारत में आरोग्य सेतु ऐप लॉन्च हो चुका है, जबकि ब्रिटेन के ऐप एनएचएस-एक्स का पायलट टेस्ट चल रहा है। वैज्ञानिक करीब 30 देशों के ऐप की स्टडी कर रहे हैं। वे इन ऐप के व्यवहार, खासकर डेटा की प्राइवेसी संबंधी शंकाओं को लेकर संतुष्ट नहीं हैं। ब्रिटेन समेत अन्य यूरोपीय देशों के वैज्ञानिकों और रिसर्चर्स ने भी इन ऐप की आलोचना करते हुए खुला पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि ये ऐप यूजर्स के डेटा हैंडलिंग, उनकी निजता के बारे में पारदर्शी नहीं हैं। उदाहरण के तौर पर जब दो लोग मिलते हैं, तो उनके ऐप ब्लूटूथ के जरिए एक-दूसरे से संपर्क में आते हैं। ऐसे संपर्कों का ब्यौरा दोनों व्यक्तियों के मोबाइल ऐप में सेव होता है। कई ऐप यूजर के लोकेशन का डेटा भी लेते हैं। अगर ये डेटा हैकर के हाथ लग जाए, ऐप के नियंत्रक इससे यूजर्स की स्थिति की पहचान करने लगें, तो यह निजता के लिए बड़ा खतरा होगा। वैज्ञानिक लॉन्च से पहले ऐप का विश्लेषण करना चाहते वैज्ञानिकों को ऐप लॉन्च होने से पहले ऐसे दुष्प्रभावों का विश्लेषण करने का मौका मिले।...

पहली बार 71 करोड़ रुपए देकर अंतरिक्ष की सैर पर जा रहे पर्यटक, निजी कंपनी स्पेस एक्स का पहला मिशन शुरू

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आखिर वो घड़ी भी आई गई, जिसका लंबे वक्त से इंतजार था। अंतरिक्ष की सैर के लिए सरकारी प्रभुत्व खत्म करते हुए अमेरिका की निजी कंपनी स्पेस एक्स के बनाए रॉकेट के सहारे नासा के अंतरिक्ष यात्री बॉब बेनकेन और डग हर्ली अंतरिक्ष जा रहे हैं। दोनों फ्लोरिडा के केनेडी स्पेस सेंटर से स्पेस एक्स के नए क्रू ड्रैगन कैप्सूल में बैठे। यह वही जगह है, जहां से नील आर्मस्ट्रांग अपोलो के क्रू सदस्यों के साथ चांद की ऐतिहासिक यात्रा पर गए थे। एक दशक बाद यह पहला मौका है, जब अमेरिका का रॉकेट अपनी ही जमीं से उड़ान पर जा रहा है। कोरोना महामारी के बावजूद यह यात्रा निर्धारित समय पर शुरू हो रही है। अमेरिकी अंतरिक्ष अभियानों को रूस की उड़ानों का सहारा लेना पड़ा अमेरिका ने 2011 में यान भेजने बंद कर दिए थे। इसके बाद अमेरिकी अंतरिक्ष अभियानों को रूस की उड़ानों का सहारा लेना पड़ा। इसका खर्च लगातार बढ़ता जा रहा था। इसके बाद नासा ने स्पेस एक्स को बड़ी आर्थिक मदद देकर अंतरिक्ष मिशन के लिए मंजूरी दी। एलन मस्क की इस कंपनी ने 2012 में पहली बार अंतरिक्ष में अपना कैप्सूल भेजा। इस कैप्सूल के छह बार अंतरिक्ष में जाने की उम्मीद है ...